राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र, दिल्ली
(राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद की एक इकाई)
राष्ट्रीय विज्ञान केंद्र, दिल्ली
A Unit of National Council of Science Museums

गैलरी >> प्रागैतिहासिक जीवन

नई दीर्घा आगंतुकों को एक आकर्षक प्रागैतिहासिक दुनिया में ले जाती है, जहाँ पृथ्वी पर लाखों वर्ष पूर्व विद्यमान जीवन को पुनर्स्थापितकिया गया है - यह एक ऐसी दुनिया है जिसे किसी भी इंसान ने नहीं देखा है और जहां कई जीव-जंतु बहुत पहले ही विलुप्त हो चुके हैं।इस दीर्घा में विभिन्न भूवैज्ञानिक युगोंसे चयनित 35 प्रजातियों को प्रदर्शित किया गया है, जिनमें ट्राइलोबाइट, विशाल बिच्छुओं से लेकर प्रारंभिक पक्षी,विशालकाय डायनासोर तथा अंततः निएंडरथल मानव शामिल हैं। इन जीव-जंतुओं को अत्यंत सूक्ष्मता से निर्मित परिवेशों में प्रस्तुत किया गया है, जिन्हें प्रकाश एवं ध्वनि प्रभावों के माध्यम से और भी जीवंत बनाया गया है, जिससे प्राचीन पारिस्थितिक तंत्र सजीव प्रतीत होते हैं। इसमें कई प्रदर्शनियाँ इलेक्ट्रो-न्यूमैटिक तकनीक द्वारा संचालित हैं, जो उनमें गति और यथार्थता का समावेश कर उन्हें अत्यंत रोचक एवं प्रभावशाली अनुभव प्रदान करती हैं। इन प्रदर्शनों के साथ-साथ सूचनात्मक पैनल भी हैं, जो पृथ्वी और जीवन की कहानी को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत करते हैं, जिसमें ग्रह की उत्पत्ति, भू-आकृतियों का निर्माण,प्रमुख भूवैज्ञानिक परिवर्तन, वायुमंडल का विकास, जल में जीवन का उद्भव, उसका स्थल पर प्रसार तथा प्रारंभिक सामूहिक विलुप्तियों के कारणों का वर्णन शामिल है। समग्र रूप से, ये सभी प्रदर्शनियाँ मिलकर दर्शकों को मानवता के कुछ सबसे गहन प्रश्नों पर चिंतन करने के लिए प्रेरित करते हैं: पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत कैसे हुई? समय के साथ इसका विकास कैसे हुआ? हमारे पूर्वज कौन हैं? क्या हमारे ग्रह के परे भी जीवन संभव है? और मानव जाति का भविष्य क्या है?
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