गैलरी >> हमारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विरासत
“भारतीय विरासत: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी” पर आधारित यह दीर्घा भारत की सहस्राब्दियों में विकसित हुई लगभग 4,500 वर्षों से अधिक की गौरवशाली वैज्ञानिक यात्रा को सजीव रूप में प्रस्तुत करती है। आकर्षक प्रदर्शनों के माध्यम से यह दर्शाती है कि भारतीय भूमि पर कला और साहित्य के साथ-साथ एक समृद्ध एवं परिपक्व वैज्ञानिक-तकनीकी परंपरा का विकास किस प्रकार हुआ। दीर्घा में प्राचीन संस्कृत ग्रंथों से प्राप्त उस गहन ज्ञान को प्रदर्शित किया गया है, जो पदार्थ की संरचना, परमाणुवाद, ब्रह्मांडीय विकास तथा गणित के उन्नत सिद्धांतों को उजागर करता है। इसमें शून्य की क्रांतिकारी अवधारणा, दस की घातों की प्रणाली तथा गणना की प्रारंभिक विधियाँ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं, जिन्होंने न केवल भारतीय चिंतन को समृद्ध किया, बल्कि विश्व की वैज्ञानिक प्रगति को भी गहराई से प्रभावित किया।
आगंतुक भारत के खगोल विज्ञान में अग्रणी योगदानों का भी अवलोकन कर सकते हैं, जिसमें खगोलीय गतियों के प्रारंभिक अध्ययन तथाजंतर मंतर वेधशालाएँ, जिन्हें सवाई जय सिंह द्वितीय ने निर्मित कराया, का प्रदर्शन शामिल है। दीर्घा में आयुर्वेद की आधारशिला को भी प्रमुखता से दर्शाया गया है, जिसमें प्रसिद्ध ग्रंथ जैसेचरक संहिता, सुश्रुत संहितातथाअष्टांग हृदयशामिल हैं, जो आज भी आधुनिक चिकित्सा का मार्गदर्शन करते हैं। आधुनिक युग में प्रवेश करते हुए, यह प्रदर्शनी अंतरिक्ष विज्ञान, परमाणु प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, कृषि, ऊर्जा एवं परिवहन के क्षेत्रों में भारत की उल्लेखनीय प्रगति को भी प्रदर्शित करती है, जो आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में राष्ट्र की यात्रा को रेखांकित करती है। समग्र रूप से,ये सभी प्रदर्शनियाँ इस तथ्य को प्रभावी रूप से रेखांकित करते हैं कि भारत की समृद्ध वैज्ञानिक विरासत आज भी नवोन्मेष की प्रेरणा स्रोत बनी हुई है और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य को सुदृढ़ रूप से आकार प्रदान कर रही है।






