गैलरी >> सूचना क्रांति
सूचना क्रांति दीर्घा मानवता की उस शाश्वत खोज को दर्शाती है, जिसमें ज्ञान को अभिलेखित करने, संरक्षित रखने और साझा करने का प्रयास निहित है। यह यात्राभीमबेटका गुफा चित्रों से शुरू होती है, जहाँ आदिमानवोंने पत्थर की दीवारों पर पशुओं और दैनिक जीवन के जीवंत दृश्य उकेरेथे, जो संचार की शुरुआत का प्रतीक है।इन प्रारंभिक/आदिमचित्रों के साथ-साथ वनस्पतियों और जीव-जंतुओं के जीवाश्म तथा वृक्षों के मौन वार्षिक वलय हमें यह स्मरण कराते हैं कि प्रकृति स्वयं भी समय और स्मृति की एक अभिलेखक व संरक्षक है।यह कथा सिंधु घाटी सभ्यता की कलाकृतियों/अवशेषों, प्राचीन सिक्कों और खरोष्ठी लिपि, ब्राह्मी लिपिऔरपाली भाषाजैसी प्राचीन लिपियों के माध्यम से आगे बढ़ती है, जो यह दर्शाती हैं कि समाजों ने संस्कृति, विश्वास और पहचान को किस प्रकार संहिताबद्ध किया।प्राचीनमूर्तियाँ, रागमाला चित्रकला, भारत के मुखौटे और अंगिका की भावपूर्णसजीव मुद्राएँ इस बात पर प्रकाश डालती हैं कि कला, अनुष्ठान और प्रदर्शन किस प्रकार सशक्त कथावाचन के माध्यम बने।पांडुलिपियाँ और उनके लेखनउपकरण विचारों के नाजुक लेकिन स्थायी वाहक हैं, जो मौखिक परंपराओं को संरचित अभिलेखागार से जोड़ते हैं।प्रिंटिंग प्रेस, समाचार पत्रों और कार्टूनों और व्यंग्यचित्रों की तीक्ष्ण बुद्धि के साथ क्रांति ने गति पकड़ी, जिसने ज्ञान का लोकतंत्रीकरण किया और जनमत को स्वर प्रदान किया।टेलीग्राफ और प्रकाशस्तंभसंचार प्रणालियों ने गति और कोडित संकेतों की शुरुआत की, जबकि ग्रामोफोन, फिल्में और कैमरे—पिनहोल से एनालॉग और डिजिटल तकने कथावाचन को ध्वनि,, दृश्य और स्मृति के नए आयामों में विस्तारित किया।आधुनिक प्रिंट मीडियाऔर फोटोग्राफी ने सूचना को जन-अनुभव में परिवर्तित कर दिया, जबकि रेडियो और टेलीविजन ने आवाज़ों और चित्रों को घर-घर तक पहुँचाकर राष्ट्रों के बीच साझा कथाएँ निर्मित कीं। अंततः, दीर्घा डिजिटल युग में प्रवेश करती है। वैक्यूम ट्यूब, ट्रांजिस्टर और डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स के आविष्कार ने संगणना(कम्प्यूटेशन) की नींव रखी, जिससे मशीनें छोटी होती गईं और उनकी क्षमता कई गुना बढ़ गई।
इन प्रगतियों के साथ आधुनिक रेडियो और टेलीविजन भी विकसित हुए, जबकि इंटरनेट ने पूरे विश्व को एक नेटवर्क में जोड़कर संचार, व्यापार और समुदाय की अवधारणाओं को पुनर्परिभाषित कर दिया।गुफा की दीवारों से लेकर कंप्यूटर स्क्रीन तक, जीवाश्मों से लेकर फिल्मों तक—“सूचना क्रांति दीर्घा” विकास और नवाचार की एक निरंतर श्रृंखला को दर्शाती है; यह मानवता की उस जीवंत कहानी को दर्शाती है, जिसमें पीढ़ी दर पीढ़ी जुड़ने, याद रखने और संवाद करने की अनवरत प्रेरणा निहित है।इस दीर्घा के अंत में निकास द्वार आगंतुकों को अगले युग की ओर ले जाता है, ‘डिजिटल दीर्घा’जहाँ यह कहानी आधुनिक डिजिटल विश्व के युग में आगे बढ़ती है।


